संगठन पदानुक्रम

आयुक्त

आयुक्त, संगठन के कार्यपालक प्रमुख तथा केन्द्रीय विद्यालयों के मुख्य प्रशासक होंगे तथा बोर्ड द्वारा निर्धारित कार्यों तथा नीतियों के उचित क्रियान्वयन हेतु जिम्मेदार होगे । मुख्यालय कार्यालय दिल्ली में उनकी सहायता के लिए दो अपर आयुक्त, पाँच संयुक्त आयुक्त. चार उपायुक्त तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी समय-समय पर स्वीकृती तथा नियुक्ति के अनुसार होंगे ।

अपर आयुक्त

संगठन का अपर आयुक्त (प्रशासन) आयुक्त के अधीन मुख्य अधिकारी होगा तथा संगठन के पंजीकृत कार्यालय का प्रभारी होगा । उसके मुख्य कार्य निम्न होंगे –

  • वह संगठन के सभी लेखाओं पर सामान्य पर्यवेक्षण करेगा. संगठन की ओरभुगतान हेतु सभी बिलों को मंजूर करेगा, संगठन के लेखाओं को अद्यतन रखने हेतु व्यवस्था करेगा तथा और सभी अन्य कार्य करेगा जो संगठन को संचालित करने हेतु आवश्यक एवं प्रासंगिक हैं ।
  • वह अधिशासी मंडल की स्वीकृति हेतु बजट तैयार करेगा ।
  • वह संगठन की तथा बोर्ड की सभी बैठकों में भाग लेगा तथा उनकी कार्यवाहियों को कार्यवृत पुस्तिका में रिकॅर्ड करेगा ।
  • संपत्ति संबंधी विलेखों को छोड़कर जब तक कि इस संबंध में अधिशासी मंडल द्वारा अधिकृत न किया गया हो वह संगठन तथा अधिशासी मंडल की ओर से सभी संविदाओं, विलेखों तथा अन्य लिखित दस्तावेजों का निष्पादन तथा उन पर हस्ताक्षर करेगा ।
  • वह मुख्यालय कार्यालय के कुशल प्रशासन के लिए जिम्मेवार होगा तथा नीतिनिर्धारण, लेखाओं, प्रशासन तथा अनुशासन संबंधी मामलों में आयुक्त का मुख्य सलाहकार होगा । सोसाइटीज पंजीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21 वां) की धारा-ई के उद्देश्य के लिए अपर आयुक्त (प्रशासन) संगठन का मुख्य कार्यपालक माना जाएगा तथा संगठन अपर आयुक्त के नाम मुकदमा कर सकता है तथा उसके नाम से चलाया जा सकता है ।
  • अपर आयुक्त (शैक्षिक) संगठन के शैक्षिक विंग को देखने के लिए आयुक्त के अधीन मुख्य अधिकारी होगा । वह विभिन्न स्तरों पर शैक्षिक कार्यों की प्रगति की देखभाल, सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन, खेलकूद गतिविधियों के समन्वय तथा सहपाठ्यचर्चा गतिविधियाँ देखेंगे । वह शिक्षा सलाहकार समिति का सदस्य सचिव भी होगा ।

संयुक्त आयुक्त

  • संयुक्त आयुक्त(वित्त),संगठऩ का आतंरिक वित्त सलाहकार तथा मुख्य लेखा अधिकारी होगा । वह वित्त समिति तथा कार्य समिति का सदस्य सचिव होगा इनसे संबंधित सभी कार्यों के समन्वय के लिए जिम्मेदार होगा ।
  • संयुक्त आयुक्त (प्रशासन) तथा संयुक्त आयुक्त (कार्मिक), अपर आयुक्त (प्रशासन) के कार्मिक मामले जैसे- भर्ती, पदोन्नति. तैनाती तथा वरिष्ठता आदि मामलों के कार्यपालन में सहयोग करेंगे तथा संयुक्त आयुक्त (प्रशिक्षण), अपर आयुक्त (शैक्षिक) को शैक्षिक उपलब्धि के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन तथा सेवाकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन में सहायता प्रदान करेंगें ।

शाखाधिकारी

मुख्यालय कार्यालय में विभिन्न अनुभागों का कार्य शाखा स्तर पर उपायुक्त (प्रशासन), सहायक आयुक्त (प्रशासन) अधीक्षक अभियंता (कार्य), सहायक आयुक्त आदि द्वारा पर्यवेक्षित किए जाएंगे ।

उपायुक्त (क्षेत्रीय कार्यालय)

केविसं के बोर्ड द्वारा अनुमोदित कितने भी क्षेत्रीय कार्यालय हो सकते हैं जिसका प्रमुख एक उपायुक्त होगा. जो संभाग के अधीनस्थ विद्यालयों के उचित प्रशासन, पर्यवेक्षण निरीक्षण तथा उनके नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होगा। उनके कार्य में सहायक आयुक्त, प्रशासनिक अधिकारी वित्त अधिकारी, तथा अन्य कर्मचारी उनकी सहायता करेंगे ।

अधिकारियों तथा कर्मचारियों की शक्तियां ओर उनके कर्तव्य –

संगठन के विभिन्न अधिकारियों के मुख्य कर्तव्य तथा शक्तियाँ आगे उल्लिखित अनुच्छेदों में दिए गए विवरण के अनुसार होंगी। शेष सभी अधिकार जो विशेष तौर पर किसी अन्य अधिकारी को नही सौपे गए है, बोर्ड के पास होगे । संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी शक्तियों का प्रयोग समय-समय पर निर्धारित तथा लागू नियमों तथा विनियमों के अनुसार किया जाएगा ।

  • संघ के ज्ञापन में निर्दिष्ट संगठन के उद्देश्यों को ही बोर्ड प्राय: क्रियान्वित करेगा ।
  • बोर्ड, संगठन के सभी मामलों तथा निधि का प्रबंधन करेगा तथा उसके पास अधिकारों के प्रयोग करने की शक्ति होगी ।
  • विनियम बनाने का संगठन के मामलों में प्रशासन तथा प्रबंधन हेतु विनियमों संगठन के नियमों के संगत बोर्ड के पास यह अधिकार होगा तथा पूर्ववर्ती प्रावधानों पर प्रतिकुल प्रभाव डाले बिना ये विनियम निम्नलिखित के लिए उपबंधित होगे
    • बजट प्राक्कलन तैयार करना तथा संस्वीकृती देना, व्यय की मंजूरी. संविदा तैयार करना तथा इनका निष्पादन संगठन की निधि का निवेश तथा ऐसे निवेशों से संबंधित विक्रय अथवा बदलाव लेखा तथा लेखा परीक्षा।
    • संगठन के अधिकारियों तथा कर्मचारियों की नियुक्ति हेतु प्रक्रिया संगठन द्वारा संचालित प्रबंधित विद्यालयों तथा अन्य संस्थानों तथा इसके द्वारा स्थापित और अनुरक्षित विभिन्न कार्यक्रमों एवं सेवाओं के लिए कार्यविधि ।
    • संगठन के अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की शर्ते तथा कार्यकाल, परिलब्धियां भत्ते अनुशासन के नियम तथा सेवा संबंधी अन्य शर्ते ।
    • छात्रवृत्ति के संबंध में निबंधन तथा शर्तें निशुल्कता वित्तीय तथा अन्य रियायतें, सहायता अनुदान प्रतिनियुक्ति संगठन के विद्यार्थियों एवं विद्यालयों तथा संगठन द्वारा संचालित अन्य संसाधनों के कर्मचारियों से संबंधित अनुसंधान योजनाएं तथा परियोजनाएं ।
    • संगठन के उद्देश्यों को आगे बदाने तथा इसके मामलों के उचित प्रबंधन हेतु अन्य आवश्यक मामले ।
  • बोर्ड, संकल्प द्वारा सलाहकार मंडल अथवा अन्य समितियों अथवा निकायों तथा विद्यालयों के लिए यथोचित शक्तियों सहित ऐसी शक्तियों का प्रयोग करते हुए जिसे वह उपयुक्त समझे स्थानीय प्रबंधन समितियां नियुक्त कर सकता है तथा किसी भी समिती को भंग कर सकता है, जो इसके द्वारा गठित की गई हो ।

संगठन / अधिशासी मंडल का अध्यक्ष–

अध्यक्ष संगठन और बोर्ड की सभी बैठकों की अध्यक्षता करेगा . वह यह सुनिश्चित करेगा कि संगठन/बोर्ड द्वारा लिए गए सभी निर्णयों को कार्यान्वित किया जाता है । भारत सरकार के मंत्री द्वारा किए जाने वाले अपने अधिकारों के प्रयोग के समान ही उसे अपने अधिकारों के प्रयोग का प्राधिकार होगा । वह संगठन या बोर्ड द्वारा प्रत्यायोजित अन्य शक्तियों का प्रयोग करेगा , और अधिकारों के प्रयोग संबंधी कार्रवाई की रिपोर्ट मामले के अनुसार संगठन या बोर्ड की अगली बैठक में रखेगा ।

उपाध्यक्ष

अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष बोर्ड /संगठन की बैठकों की अध्यक्षता करेगा । अध्यक्ष अपनी कुछ ऐसी शक्तियों को लिखित रुप में सौपं सकता है जिन्हें वह आवश्यक समझे ।

उप सभापति

अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपसभापति संगठन/बोर्ड की बैठकों की अध्यक्षता करेगा । वह सभी तीन स्थाई समितियों अर्थात वित्त, शिक्षा सलाहकार तथा कार्य के अध्यक्ष के रुप में काम करेगा । वह संयुक्त आयुक्तों तथा उपायुक्तो का नियुक्ति प्राधिकारी होगा ।

आयुक्त

प्रशासनिक अधिकार

  1. आयुक्त, संगठन का प्रधान कार्यपालक अधिकारी होगा और बोर्ड द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय के अधीन वह संगठन के कार्यों और अध्यक्ष तथा बोर्ड के निर्देशन तथा मार्गदर्शन के तहत संपत्ति और संस्थानों जैसे- विद्यालयों, खेल के मैदान, व्यायामशाला, होस्टल. अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के लिए आवासगृह आदि के उचित प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होगा ।
  2. मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालयों और विद्यालयों में सभी पदों पर नियुक्ति करेगा और ग्रुप ‘ए ’ पदों के लिए उपायुक्त और उससे ऊपर के पदों को छोड़कर समिति/विभागीय पदोन्नति समिति की सिफारिश करेगा ।
  3. मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालय तथा विद्यालयों में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती, स्थानांतरण तथा उन्हें कोई भी कार्य सौपनें का अधिकार होगा ।
  4. उसे केन्द्रीय विद्यालयों में शैक्षणिक तथा शिक्षणेत्तर पदों के लिए पदों का सृजन करने का अधिकार होगा । संगठन के मुख्यालय / क्षेत्रीय कार्योलयों में छह महीने तक की अवधि के लिए पदों का सृजन करना ।
  5. ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों ( संयुक्त आयुक्त सहित) की परिवीक्षा का अनुमोदन तथा स्थायीकरण ।
  6. संगठन से बाहर के पदों के लिए किन्ही सामान्य आदेशों के तहत मुख्यालय और उपायुक्तों और उसके ऊपर के वर्ग ‘क’ पदों के अधिकारियों के आवेदन पत्र अग्रेषित करना ।
  7. संगठन मे मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालयों तथा केन्द्रीय विद्यालयों के सभी कर्मचारियों को बोर्ड के सामान्य निदेशों के अऩुसार विदेश में प्रशिक्षण हेतु भेजना ।
  8. विद्यालयों के कार्य का निरीक्षण और पर्यवेक्षण करना और केन्द्रीय विद्यालयों के प्राचार्यों तथा मुख्यालय के अधिकारियों को शिक्षा के विकास संबंधी निर्देश जारी करना ।
  9. कक्षा-9 से 12 सहित सभी कक्षाओं के लिए केन्द्रीय बोर्ड द्वारा सिफारिश की गई पाठ्य पुस्तकों को अनुमोदित और निर्धारित करना ।
  10. केन्द्रीय विद्यालय योजना में सुनिश्चित कार्यक्रमों के तहत उच्च शिक्षा के विकास के लिए कार्यक्रम और योजनाएं बनाना और बोर्ड तथा भारत सरकार से अनुमोदन प्राप्त करना ।
  11. मुख्यालय, क्षेत्रीय कार्यालयों तथा केन्द्रीय विद्यालयों में सभी कर्मचारियों को पुस्तकें लिखने या उच्च शिक्षा प्राप्त करने या अन्य साहित्यिक कार्य करने के लिए अनुमति प्रदान करना ।
  12. विद्यालयों के लिए प्रवेश, परीक्षाएं तथा पदोन्नति संबंधी नियम निर्धारित करना ।
  13. विद्य़ालयों के लिए समय, विद्यालय सत्र, विद्यालय वर्ष, छुट्टियां तथा अन्य अवकाश निर्धारित करना ।
  14. उपायुक्त तथा मुख्यालय कार्यालय के अन्य अधिकारियों के लिए मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र निर्धारित करना (16) बोर्ड द्वारा अनुमोदित योजना के अनुसार छात्रों को छात्रवृति और वजीफा प्रदान करना ।
  15. मौलिक नियमों के संकलन एफ आर 9(6) (ब) की अनुरुपता पर आदेश जारी करना कि संगठन के कर्मचारी कुछ परिस्थितियों में डयूटी पर माने जाएंगे । किसी कर्मचारी की विदेश में प्रतिनियुक्ति के मामले में यह शक्ति संगठन के वित्त सदस्य की सहमति के अधीन होगी ।
  16. वर्ग ‘ग’ तथा ‘घ’ कर्मचारियों के मामले में उनकी नियुक्ति से पूर्व स्वस्थता चिकित्सा प्रमाण पत्र की छूट प्रदान करना ।
    1. चयन समिति की सिफारिश की शर्त के अधीन विद्यालयों के कर्मचारियों की प्रारंभिक नियुक्ति पर अग्रिम वेतनवृद्दि की स्वीकृति ।
    2. चयन समिति की सिफारिश के अधीन विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को प्रारंभिक नियुक्ति पर समयमान-वेतन में अधिकतम पांच वेतन वृद्दि तक अग्रिम वेतन वृद्दि प्रदान करना ।
  17. संगठन के कर्मचारी को कार्य करने की स्वीकृति प्रदान करना जिसके लिए उसे फीस का प्रस्ताव मिला हो बशर्ते यह राशि प्रत्येत मामले में 5000/- रु से अधिक न हो ।
  18. के.वि.सं के अपर आयुक्तों को छुट्टी की स्वीकृति देना ।
  19. वर्ग ‘क’ अधिकारियों से चिकित्सा आधार पर ली गई छुट्टी से वापस आने पर आरोग्यता चिकित्सा प्रमाण पत्र लेना ।
  20. स्वीकृत छुट्टियों से अधिक छुट्टियों को नियमित करने के लिए वर्ग ‘क’ अधिकारियों को अनुमति देना ।
  21. यह निर्णय करना कि कोई कर्मचारी प्रावकाशीय अथवा गैर प्रावकाशीय कर्मचारी है ।
  22. सभी निर्माण तथा रख-रखाव कार्यों के संबंध में प्रशासनिक अनुमोदन और व्यय संबंधी स्वीकृति प्रदान करना ।

वित्तीय

आयुक्त के अधिकार, पूरक नियमावली. सामान्य वित्त नियम. केन्द्रीय कोष नियम. चिकित्सा परिचर्या नियमावली केविसं (कर्मचारी) भविष्य निधि नियम के तहत विभागाध्यक्ष के अधिकारों के अनुरुप होंगे ।

अपर आयुक्त (प्रशासन)

  1. चयन समितियों की सिफारिशों पर मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्योलयों में वर्ग ‘ख’ स्तर के सभी पदों के लिए नियुक्ति करना ।
  2. मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के वर्ग ‘ख’ अधिकारियों के आवेदनों का अग्रेषण
  3. केन्द्रीय विद्यालयों के उप प्राचार्य सहित वर्ग ‘ख’ अधइकारियों की परिवीक्षा का अनुमोदन तथा स्थायीकरण
  4. संगठन के बाहर के पदों के लिए मुख्यालय. क्षेत्रीय कार्यालयों और विद्यालयों के सभी वर्ग ‘क’ अधिकारियों उपायुक्त और इससे ऊपर के पद छोड़कर, किन्ही सामान्य आदेश के तहत आवेदन पत्र अग्रेषित करना ।
  5. मुख्यालय कार्यालय तथा केन्द्रीय विद्यालयों के वर्ग ‘क तथा ‘ख’ अधिकारियों को सावर्जनिक परीक्षाओं में बैठने के लिए अनुमति प्रदान करना ।
  6. केविसं मुख्यालय के वर्ग ‘क’ अधिकारियों और क्षेत्रीय कार्यालयों के उपायुक्तों की छुट्टी मंजूर करना ।
  7. संगठन के कर्मचारियों के कल्याण को देखना ।
  8. वर्ग ‘ख’ अधिकारियों के मामलों में स्वीकृति से अधिक छुट्टियों को नियमित करना ।
  9. मुख्यालय , क्षेत्रीय कार्यालय तथा विद्यालयों में संयुक्त आयुक्त स्तर तक के वर्ग ‘क’ अधिकारियों के नाम/उपनाम में परिवर्तन हेतु अनुमति देना ।

वित्तीय शक्तियां

उसे पूरक नियमावली , सामान्य वित्तीय नियम, केन्द्रीय कोष नियम, चिकित्सा परिचर्चा नियम और के वि सं. कर्मचारी भविष्य निधि नियम जैसा परिशिष्ट में यथा वर्णित के तहत अनुरूप शक्तियां प्राप्त होंगी ।

अपर आयुक्त (शैक्षिक)

प्रशासनिक शक्तियां

  1. संगोष्ठी, पुनश्चर्या पाठ्यक्रम. सेवाकालीन प्रशिक्षण और कार्यशाला आदि की व्यवस्था करना ।
  2. मुख्यालय कार्यालय के अधिकारियों तथा केन्द्रीय विद्यालयों के प्राचार्यों को भारत में प्रशिक्षण और भारत में शैक्षिक कार्यक्रमों संगोष्ठियों और सम्मेलनों में भाग लेने हेतु भेजना । यदि इस प्रकार का प्रशिक्षण/भागीदारी संगठन के हित में हों बोर्ड द्वारा ऐसे कोई सामान्य निर्देश दिए हों ।
  3. कक्ष-1 से 8 के लिए पाठ्य पुस्तकें अनुमोदित और निर्धारित करना ।
  4. खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजीत तथा आनुषांगिक गतिविधियां आयोजित करने के लिए व्यायाम शिक्षा को बदावा देना और निर्देश जारी करना ।
  5. विद्यालयों के अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के कल्याण और व्यावसायिक शिक्षा संबंधी कार्यो को देखना (सेवाकालीन प्रशिक्षण सहित)
  6. उप प्राचार्य तथा मुख्यालय के वर्ग ‘ख’ अधिकारियों को पुस्तक लेखन अथवा उच्च शिक्षा हेतु अऩुमति प्रदान करना ।

ख) वित्तीय शक्तियां

उसे परिशिष्ट –II में यथा वर्णित पूरक नियमावली, सामान्य वित्त नियम. केन्द्रीय कोष नियम. चिकित्सा परिचर्या नियम और केन्द्रीय विद्यालय संगठन कर्मचारी भविष्य निधि नियम के अनुरूप शक्तियां होंगी ।

संयुक्त आयुक्त (प्रशासनिक/कार्मिक)

प्रशासनिक शक्तियां

  1. संगठन मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के सभी वर्ग ‘ग’ पदों पर नियुक्ति ।
  2. मुख्यालय तथा क्षंत्रीय कार्यालयों के वर्ग ख’ अधिकारियों को छुट्टियों की स्वीकृति प्रदान करना ।
  3. मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालय के वर्ग ‘ग’ कर्मचारियों की परिवीक्षा की स्वीकृति तथा स्थायीकरण ।
  4. संगठन मुख्यालय के पर्ग ‘ख’ अधिकारियों को सार्वजनिक परीक्षाओं में उपस्थित होने हेतु अनुमति प्रदान करना ।
  5. संगठन मुख्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के वर्ग ‘ख’ अधिकारियों के यात्रा-भत्ता के प्रयोजन के लिए नियंत्रण अधिकारी के रुप में कार्य करना ।
  6. वर्ग क अधिकारियों को निर्धारित समयमान में वेतन वृद्दि प्रदान करना ।
  7. वर्ग ‘क ’ तथा ‘’ख’ कर्मचारियों से छुट्टी से वापसी पर आरोग्यता का चिकित्सा प्रमाण पत्र लेना ।
  8. वर्ग ‘ग’ कर्मचारियों को स्वीकृत छुट्टी से अधिक ली गई छुट्टी नियमित करने के लिए छुट्टी बदाना ।

वित्तीय शक्तियां

उसे पूरक नियमावली. सामान्य वितीय नियम, केन्द्रीय कोष नियम. चिकित्सा परिचर्या नियम और केन्दीय विद्यालय संगठन कर्मचारी भविष्य निधि-नियमों जैसा कि परिशिष्ट-IIमें विवरण दिया गया है के अनुरूप शक्तियां होंगी ।

संयुक्त आयुक्त ( शैक्षिक/प्रशिक्षण)

प्रशासनिक शक्तियां

  1. संगठन के हित में बोर्ड द्वारा दिए गए सामान्य निदेश यदि कोई हों, के आधार पर संबंधित प्रळिक्षण में भागीदारी हेतु संगठन के मुख्यालय के वर्ग ‘ग’ अधिकारियों को प्रशिक्षण और शैक्षिक कार्यक्रमों आदि में भाग लेने हेतु प्रतिनियुक्ति करना ।
  2. केन्द्रीय विद्यालय योजना में निहित उच्च शिक्षा के विकास की योजना के लिए अपर आयुक्त (क्षैक्षिक) को योजनाओं और कार्यक्रमों को बनाने में सहायता करना ।

संयुक्त आयुक्त (वित्त)

वित्तीय शक्तियां

  1. संगठन की दो स्थायी समितियों- वित्त समिति और कार्य समिति के सचिव के रुप में कार्य करना ।
  2. आयुक्त को संगठन और इसकी संघटक इकाइयों के वित्तीय, लेखा और लेखा परीक्षा मामलों में सलाह देना ।
  3. संगठन मुख्यालय के बजट, वित्त, लेखा-परीक्षा और लेखा अनुभागों के दिन प्रतिदिन के कार्यो का पर्यवेक्षण करना ।
  4. विद्यालयों, क्षेत्रीय कार्यालयों तथा मुख्यालय के लेखाओं का निरीक्षण करना तथा जहां आवश्यक हो उचित निर्देश जारी करना ।
  5. विद्यालयों, क्षेत्रीय कार्यालयों तथा मुख्यालय कार्यालय से जानकारी मंगाना जो बजट आंकलन. वार्षिक लेखा- बनाने तथा आंतरिक के साथ-साथ बाह्य लेखा परीक्षा द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर कारवाई करने के लिए आवश्यक हो ।
  6. केन्द्रीय विद्यालय संगठन कर्मचारी भविष्य निधि, सामूहिक बीमा योजना आदि के कार्यों का प्रवंधन करना ।

उपायुक्त

प्रशासनिक शक्तियां

  1. विद्यालयों में उपप्राचार्य को छोड़कर शैक्षिक तथा शिक्षणेत्तर वर्ग ‘ख’तथा ‘ग’ पदों के लिए तथा क्षेत्रीय कार्यालय में वर्ग ‘घ’ पदों की नियुक्ति करना ।
  2. उप प्राचार्य को छोड़कर विद्यालयों में वर्ग ‘ख’ तथा ‘ग’ पदों तथा क्षेत्रीय कार्यालयों में वर्ग ‘घ’ कर्मचारियों की परिवीक्षा का अनुमोदन तथा स्थायीकरण प्रदान करना ।
  3. संगठन से बाहर के पदों के लिए विद्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालयों में वर्ग ‘ख’ तक के कर्मचारियों (उपप्राचार्य सहित) के आवेदन पत्रों को अग्रेषित करना, परंतु विदेश स्थित पदों के लिए नहीं और रोजगार कार्यालय में पंजीकरण कराने हेतु अनुमति प्रदान करना ।
  4. विद्यालयों तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के वर्ग ‘ख’ तक के कर्मचारियों (उप प्राचार्य को छोड़कर) को सार्वजनिक परीक्षाओं में बैठने की अऩुमति प्रदान करना ।
  5. विद्यालयों तथा क्षेत्रीय कार्यालयों के वर्ग ‘ख’ (उप प्राचार्य को छोड़कर) तथा वर्ग ‘ग’ के शैक्षिक कर्मचारियों को भारत में शैक्षिक कार्यक्रमों में प्रशिक्षण / भाग लेने हेतु प्रतिनियुक्त करना जहां इस प्रकार का प्रशिक्षण/प्रतिभागिता संगठन के हित में समझी जाए ।
  6. विद्यालयों को यह सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षित और पर्यवेक्षित करना कि विद्यालयों मेंपाठ्यक्रम संबंधी तथा पाठ्यक्रमों के साथ अन्य गतिविधियां ठीक से हो रही हैं और उनमें सुधार संबंधी सुझाव, यदि कोई हो, देना ।
  7. विद्यालयों के प्रशासन से संबन्धित निरीक्षण, पर्यवेक्षण और सुधार हेतु सुझाव ।
  8. उप-प्राचार्य को छोडकर विद्यालयों के वर्ग ‘ख’, ‘ग’ तथा ‘घ’ कर्मचारियों के नाम/उपनाम में परिवर्तन की अनुमति देना ।
  9. विद्यालयों /क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मचारियों के कल्याण संबंधी कार्यों को देखना ।
  10. विद्यालयों /क्षेत्रीय कार्यालयों के कर्मचारियों (उप-प्राचार्य को छोडकर) को उच्च शिक्षा प्राप्त करने या पुस्तकें लिखने या कोई अन्य साहित्यिक कार्य करने की अनुमति प्रदान करना ।
  11. मूल नियमावली वित्त नियम -9(6) के अनुरूप विद्यालयों के वर्ग ‘ग’ कर्मचारियों को इस संबंध में आदेश जारी करना कि किसी कर्मचारी को कतिपय परिस्थितियों में जारी आदेशानुसार ड्यूटी पर माना जाएगा ।
  12. प्राचार्य तथा उप-प्राचार्य को छोडकर विद्यालय के कर्मचारियों को समय-समय पर जारी केंद्रीय विद्यालय संगठन के सामान्य आदेशों के तहत एक ही क्षेत्र में एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण करना ।
  13. क्षेत्रीय कार्यालय तथा विद्यालयों के वर्ग ‘ग’ कर्मचारियों के संबंध में आरोग्यता का चिकित्सा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता समाप्त करना ।
  14. क्षेत्रीय कार्यालय के वर्ग ‘ख’, ‘ग’ तथा ‘घ’ कर्मचारियों और विद्यालयों के प्राचायों तथा उप-प्राचायों को निर्धारित समयमान में वार्षिक वेतनवृद्धि स्वीकृत करना ।
  15. उस कार्य के बचनबंध को स्वीकृति प्रदान करना जिसके लिए शुल्क लिया गया हो और विद्यालय तथा क्षेत्रीय कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा (प्राचार्य को छोडकर) शुल्क स्वीकृत किया गया हो, बशर्ते यह राशि प्रत्येक मामले में 2500 रु. से अधिक न हो (दो हजार पाँच सौ रुपये) ।
  16. . विद्यालयों के वर्ग ‘ख’ तथा ‘ग’ कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पूर्व छुट्टी प्रदान करना तथा छुट्टी आदि अस्वीकृत करना ।
  17. क्षेत्रीय कार्यालय के वर्ग ‘ख’, ‘ग’ तथा ‘घ’ कर्मचारियों और विद्यालयों के प्राचायों की छुट्टी मंजूर करना ।

वित्तीय शक्ति

पूरक प्रश्नावली, सामान्य वित्तीय नियम, केंद्रीय कोष नियम, चिकित्सा परिचर्या नियम तथा केंद्रीय विद्यालय संगठन कर्मचारी भविष्यनिधि नियमावली जैसाकि परिशिष्ठ -2 में उल्लिखित है, के तहत दिए गए अधिकारों के अनुरूप उसके अधिकार होंगे ।

मुख्यालय के शाखा अधिकारी

मुख्यालय कार्यालय में विभिन्न अनुभागों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों के सहयोग से कार्यों का पर्यवेक्षण आयुक्त द्वारा यथा अनुमोदित कार्य के वितरण के अनुसार शाखा स्तर पर विभिन्न अधिकारियों द्वारा किया जाएगा ।

सहायक आयुक्त

सहायक आयुक्त के कार्य निम्न प्रकार से होंगे -

  1. उपायुक्त को प्रशासनिक प्रकार्यों में सहयोग करना ।
  2. अध्यापकों तथा प्राचार्यों द्वारा मांगे गए संसाधनों की पूर्ति करना । 3) सतत और व्यापक मूल्यांकन में मदद करना ।
  3. प्रायौगिकी तथा नवाचार को प्रोत्साहित करना ।
  4. सीसीए क्षेत्रों में अध्यापकों का मार्गदर्शन तथा सहायता करना ।
  5. मंद तथा जन्मजात गुणी बच्चों के लिए कार्यक्रम विकसित करना ।
  6. पाठ्यक्रम तथा सह – पाठ्यक्रम गतिविधियों के संबंध में संगठन के अनुदेशों और नीतियों का कार्यान्वयन करना और विद्यालय के सभी क्षेत्रों में उच्च विकास के लिए कदम उठाना ।
  7. विद्यालय को सही दिशा में ले जाना और स्वस्थ अध्यापक-शिष्य संबंध विकसित करना ।
  8. लेखाओं तथा विद्यालय रिकॉर्ड, शैक्षिक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा-पुस्तिकाएँ, विवरणियाँ और आंकड़ों से संबन्धित कार्यों को ठीक से देखना जैसाकि संगठन द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाता है ।
  9. विद्यालय के कर्मचारियों के कल्याण संबंधी कार्यों को देखना ।
  10. विद्यालय से संबन्धित सरकारी पत्राचार का निरूपण तथा पत्रों के उत्तर निर्धारित तिथि तक देना, संगठन द्वारा अपेक्षित विवरणियों से संबन्धित जानकारी प्रेषित करना ।
  11. शैक्षणिक सत्र आरंभ होने से पूर्व शैक्षिक कर्मचारी, फर्नीचर, प्रयोगशाला उपस्कर और सहायक शिक्षण सामग्री आदि के लिए प्रस्ताव बनाना और उपायुक्त के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करना ।
  12. अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों को वेतन सहित सभी भुगतान समय से नियमानुसार करना । 13). यह सुनिश्चित करना कि शिक्षण शुल्क और वसूली जाने वाली विद्यालय विकास निधि संगत बैंक खाते में समय पर जमा की जाती है ।
  13. विद्यालय के लिए आवश्यक सामान आदि निर्धारित क्रियाविधि के अनुसार खरीदना और इस प्रकार की सामग्री की स्टॉक रजिस्टर में प्रविष्टि करना, बिलों की संवीक्षा करना और भुगतान करना ।
  14. विद्यालय संपत्ति तथा स्टॉक का नियमानुसार रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए वर्ष में कम से कम एक बार सत्यापन करना और समयानुसार रजिस्टरों का निरीक्षण करना ।
  15. विद्यालय विकास निधि के सही उपयोग के लिए उत्तरदायी होने के नाते इसके लिए अलग खाता खोला जाएगा । इस खाते का प्रचालन और निधि संचालन संगठन द्वारा समय-समय पर बनाए गए नियमों के अनुसार किया जाएगा ।
  16. पीने के पानी तथा विद्यार्थियों के भोजनावकाश के लिए अन्य सुविधाओं की संतोषजनक व्यवस्था करना और सुनिश्चित करना कि विद्यालय भवन और उसके जुड़नार और फर्नीचर कार्यालय उपस्कर, प्रयोगशालाएँ, खेल के मैदान, विद्यालय का बगीचा आदि की सही-सही देख-रेख करना ।
  17. अपने विद्यालय को स्थानीय अवकाश प्रदान करना, एक शैक्षणिक सत्र में शिक्षा संबंधी और अन्य सद्भाव उद्देश्यों के लिए सात दिन से अधिक नहीं होनी चाहिए ।
  18. विद्यालय के शैक्षिक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के कार्य का पर्यवेक्षण, मार्गदर्शन और नियंत्रण ।
  19. विद्यालय में प्रवेश से संबन्धित सभी कार्यों का प्रभार, विद्यालय की समय-सारणी बनाना, अध्यापकों की ड्यूटी नियत करना, उन्हें उनके कार्यों के लिए आवश्यक सुविधा प्रदान कराना और संगठन के निर्धारित नियमों के अनुसार समय-समय पर परीक्षाएँ तथा टैस्ट आयोजित करना ।
  20. अपने सहकर्मियों से विचार-विमर्श करके पहले से ही वर्ष के शैक्षणिक कार्यों की योजना बनाना तथा महीने में किए गए कार्य की समीक्षा और विद्यार्थियों में विकास का मूल्यांकन करने के लिए महीने में कम से कम एक बार विषय समिति और स्टाफ की बैठक आयोजित करना ।
  21. अध्यापकों की मदद करना और उनका मार्गदर्शन करना तथा उनकी संव्यावसायिक प्रगति के लिए सेवा के दौरान प्रशिक्षण के लिए बनाए गए पाठ्यक्रमों में उनकी भागीदारी को सक्रियता से प्रोत्साहित करना ।
  22. अध्यापकों की स्वयं सुधार की पहल को आगे बढ़ाना और गहन अध्ययन करने वाले अध्यापकों को प्रयोग हेतु प्रोत्साहित करना ।
  23. विभिन्न विषयों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य के विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए अध्यापकों को प्रयोग में चालू पाठ्यक्रमों में और पाठ्यक्रमों के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करना और अनुदेशात्मक कार्यक्रमों को अंतर विषय समन्वय के संबंध में परिवर्तित करना । ऐसा अध्ययन तब खास तौर पर आवश्यक होगा जब एक सह पाठ्यक्रम समाविष्ट किया जाए ।
  24. यह सुनिश्चित करना कि शिक्षक डायरी इस तरह बनाई जाती है कि
    • (क). वह अध्यापक को उसके दिन प्रतिदिन के कार्य में मदद करती है
    • (ख). वह अन्य लोगों को उसके कार्य को समझने और प्रशंसा करने में मदद करती है ।
  25. कक्षा में अध्यापन को पर्यवेक्षित करना और एक जैसे विषय क्षेत्र और इसके साथ ही अन्य विषयों के अध्यापकों में सहयोग और समन्वय कायम करना ।
  26. व्यवसाय में प्रवेश करने वाले नए अध्यापकों को विशेष मदद करना और मार्गदर्शन करना ।
  27. विद्यार्थियों के लिखित कार्य और गृह कार्य की संवीक्षा के लिए एक नियमित समय सारणी तैयार करना और निर्धारित करना और यह सुनिश्चित करना कि उनका मूल्यांकन किया जाता है और त्रुटियों में प्रभावकारी ढंग से सुधार किया जाता है ।
  28. विद्यार्थियों को उनकी आवश्यकतानुसार विशेष शिक्षण देने के लिए अपेक्षित व्यवस्था करना ।
  29. अध्यापकों को नई रेटिंग अनुसूची के बारे में सूचित करना जो उनके वार्षिक कार्य के मूल्यांकन के लिए समय-समय पर विनिर्दिष्ट किया जाए । उनके कार्य का यथार्थ रूप से मूल्यांकन करना और विद्यालय को सुधारने के लिए किसी भी अध्यापक द्वारा किए गए सफल प्रयोग अथवा सराहनीय कार्यों को उपायुक्त की जानकारी में लाना ।
  30. हाउस प्रणाली या किसी अन्य प्रभावी तरीके से विभिन्न सह-पाठ्यचर्या कार्यक्रमों का आयोजन और समन्वय करना (32). उचित योजना बनाने के बाद आवधिक शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित करना ।
  31. विद्यालय में पुस्तकालय संसाधन और पढ़ने की सुविधाएं विकसित करना तथा यह सुनिश्चित करना कि स्थापित मान्यताओं और महत्व की पुस्तकें और पत्र-पत्रिकाएँ अध्यापकों और विद्यार्थियों को मिलें ।
  32. माता-पिता और शिक्षक संघ बनाने के लिए प्रोत्साहित करना ताकि विद्यालयों के कार्यक्रमों में अभिभावकों/माता-पिता से संपर्क और सहयोग प्राप्त किया जा सके ।
  33. विद्यार्थियों की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से उनके माता-पिता / अभिभावकों को भेजना और सत्रांत परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को माता-पिता को दिखाना ।
  34. विद्यार्थियों में शारीरिक स्वस्थता, सफाई के उच्च मान और स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देना और वर्ष में विद्यार्थियों की दो बार चिकित्सा परीक्षण की व्यवस्था करना और चिकित्सा रिपोर्ट माता-पिता/अभिभावकों को भेजना ।
  35. उप प्राचार्य को छोडकर विद्यालय के सभी कर्मचारियों को वेतन वृद्धि अनुमोदित समय मान में स्वीकृत करना ।
  36. संगठन के नियमों के अनुसार सेवा-निवृत्ति पूर्व अवकाश छोडकर अवकाश स्वीकृत करना और विद्यालय के शैक्षिक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को अवकाश नामंज़ूर करना ।

वित्तीय शक्तियां

प्राचार्य की वित्तीय शक्तियां लेखा संहिता में परिभाषित विवरण के अनुसार होंगी ।

उप प्राचार्य

उप प्राचार्य, प्राचार्य के समग्र मार्गदर्शन के तहत कार्य करेगा और उसके लिए प्राचार्य द्वारा जो भी कार्य निर्धारित किए जाएँगे उन्हें वह करेगा । इनमें से कुछ निम्नलिखित हो सकते हैं –

  1. शैक्षणिक समन्वय के मामलों में प्राचार्य की मदद करना, विद्यालय समय सारणी बनाना, विषय समिति बैठकों का समन्वय विद्यार्थियों के लिखित कार्य और गृह कार्य की संवीक्षा, विद्यालय परीक्षाओं का समन्वय और विद्यार्थियों की प्रगति रिपोर्ट को समय से उनके माता-पिता के पास भेजना आदि ।
  2. खेल और व्यायाम शिक्षा सहित विद्यालय की विभिन्न पाठ्य सहगामी अनुक्रियाएँ आयोजित करना ।
  3. संस्थान के संसाधनों जैसे –विद्यालय पुस्तकालय, प्रयोगशालाएँ, शिक्षण सहायक सामग्री आदि को विकसित करना ।
  4. पुस्तकालय के लिए पुस्तकें और पत्र-पत्रिकाएँ तथा प्रयोगशालों के किए उपयुक्त उपस्कर खरीदने में प्राचार्य की सहायता करना ।
  5. विद्यालय के सामान आदि का रखरखाव और सफाई तथा संपत्ति और भंडार का सही अनुरक्षण संबंधी देखभाल करना । विद्यालय संपत्ति के सही अनुरक्षण और प्रत्यक्ष सत्यापन में उचित कार्यविधियों द्वारा प्रधानाचार्य की मदद करना ।
  6. प्राचार्य के अवकाश पर रहने अथवा ड्यूटी पर विद्यालय से दूर रहने पर उसे सौंपी गई विशेष प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करना ।

प्राचार्य की अनुपस्थिति में स्थानापन्न व्यवस्था

यदि दो महीने से कम अवधि के लिए पद रिक्त हो – प्राचार्य की विद्यालय से अनुपस्थिति के दौरान, चाहे वह बीमारी या किसी अन्य कारण से हो, विद्यालय प्रबन्धक समिति उस विद्यालय के सबसे वरिष्ठ पीजीटी या अध्यापक को प्राचार्य के कार्यों का प्रभार संभालने के लिए कहेगी, बशर्ते कि उस विद्यालय में उप प्राचार्य पदासीन न हों । इस प्रकार नियुक्त किया गया अध्यापक अपने कार्यों के साथ –साथ प्राचार्य के दैनिक कार्यों का प्रभारी होगा । इस प्रकार की स्थानापन्न व्यवस्था के किए कोई कार्यभार भत्ता देय नहीं होगा लेकिन विद्यालय प्रबन्धक समिति द्वारा किए गए प्रबंधों के बारे में एक सूचना क्षेत्रीय कार्यालय को भेजी जानी चाहिए ।

यदि दो महीने की अवधि से अधिक समय तक पद रिक्त हो - दो महीने से अधिक अवधि की रिक्ति के मामले में नियुक्त किया जाने वाला व्यक्ति प्राचार्य के पद का चालू कार्यभार लेगा । इस प्रकार की व्यवस्था क्षेत्र के उपायुक्त के पूर्व परामर्श के बाद ही होंगी । स्टाफ के इस प्रकार के सदस्य जो प्राचार्य के कार्य का वर्तमान प्रभार संभालने के लिए नियुक्त किए जाएँगे नीचे सूचित तरीके से 300/- रु. प्रति माह कार्य भार भत्ता लेने के हकदार होंगे, बशर्ते कि स्थानापन्न अवधि दो माह से अधिक हो ।

एक स्नातकोत्तर शिक्षक जो उप प्राचार्य के रूप में पदोन्नत किया गया हो और साथ ही प्रभारी प्राचार्य के रूप में पदासीन किया गया हो, उसे यह विकल्प दिया जा सकता है कि वह या तो उप प्राचार्य के पद का वेतन प्राप्त करे या स्नातकोत्तर शिक्षक का वेतन और कार्य भार भत्ता प्राप्त करे । विकल्प का प्रयोग उसके प्रभारी प्राचार्य के रूप में नियुक्ति के एक माह के भीतर किया जाएगा ।

यदि कोई उप प्राचार्य विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य के रूप में नियुक्त किया जाता है, जहां प्राचार्य की अनुपस्थिति में पहले से ही उप प्राचार्य के रूप में कार्य कर रहा हो, उसे प्राचार्य की अनुपस्थिति में उप प्राचार्य के वेतन के साथ-साथ कार्य -भार भत्ता प्राप्त करने की अनुमति मिल सकती है, बशर्ते उसके द्वारा धारित उप प्राचार्य के पद को भरा नहीं जाता ।

यदि कोई उप प्राचार्य किसी अन्य विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य के रूप में स्थानांतरित किया जाता है, वह केवल उप प्राचार्य के वेतन को ही प्राप्त करता रहेगा ।
यदि कोई प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक प्रभारी प्राचार्य के रूप में दो माह से अधिक समय के लिए पद पर नियुक्त किया जाता है तो वह प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक के रूप में अपने वेतन के साथ-साथ 200/- रु. प्रति माह कार्य-भार भत्ता प्राप्त करने का हकदार होगा ।

मुख्याध्यापक

प्राचार्य के समग्र मार्गदर्शन में मुख्याध्यापक प्राथमिक अनुभाग को चलाने के लिए उत्तरदायी होगा और निम्नलिखित कार्य करेगा ।

  1. प्राथमिक शिक्षा विभाग के पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करना ।
  2. प्राथमिक शिक्षकों की मदद तथा उनका मार्गदर्शन करना ।
  3. प्राथमिक शिक्षकों के लिए पाठ्यक्रम तथा पाठ्यविवरण हेतु कार्यशालाएँ आयोजित करना, विभिन्न विषयों के अध्यापन के विश्लेषण के विचार से और उनके लिए उपयुक्त शिक्षा कार्यक्रम अपनाना ।
  4. सुनिश्चित करना कि शिक्षक डायरी नियमित रूप से बनाई जाती है ।
  5. सुनिश्चित करना कि पाठ योजनाएँ/इकाई योजनाएँ नियमित रूप से बनाई जाती है ।
  6. केविसं के कार्यों के संबंध में पर्यवेक्षण चैनल तथा जवाबदेही के संबंध में निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है ।
    • अध्यक्ष
    • उपाध्यक्ष
    • वाइस चेयरमैन
    • आयुक्त
    • अपर आयुक्त(शैक्षिक)
    • अपर आयुक्त(प्रशासन)
    • संयुक्त आयुक्त(शैक्षिक)
    • संयुक्त आयुक्त(प्रशासन)
    • संयुक्त आयुक्त(वित्त)
    • उपायुक्त (शैक्षिक)

उपायुक्त(प्रशासन) उपायुक्त (प्रशा. एवं वित्त )

केविसं द्वारा अपने कार्यों को संचालित/निष्पादित करने के लिए निर्धारित मानक

  1. विद्यालय स्तर – मुख्य कार्यकारी/कार्यकर्ता अधिकारी –प्राचार्य – विद्यालय के कर्मचारियों का रिपोर्टिंग प्राधिकारी
  2. क्षेत्रीय स्तर - मुख्य कार्यकारी/कार्यकर्ता अधिकारी – उपायुक्त –प्राचार्य तथा कर्मचारियों का रिपोर्टिंग प्राधिकारी, सहायक आयुक्त तथा उपायुक्त प्राप्तकर्ता प्राधिकारी
  3. मुख्यालय स्तर - मुख्य कार्यकारी/कार्यकर्ता अधिकारी –आयुक्त

नियम –विनियम –अनुदेश –मैनुअल

  1. केविसं द्वारा अपने कार्यों को समुचित ढंग से संचालित करने के लिए अपने स्वयं के नियम एवं दिशा –निर्देश निर्धारित किए गए हैं जिन्हें केविसं की शिक्षा संहिता तथा लेखा संहिता में संकलित किया गया है ।
  2. दस्तावेज़ केविसं के शैक्षणिक, प्रशासनिक, कार्मिक, वित्त, विधि संबंधी सतर्कता दस्तावेज़ तथा नीतिगत कागजात से संबन्धित हैं जिन्हें मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अनुमोदित किया गया है ।
  3. कुछ दस्तावेज़ केविसं कर्मचारियों के मामलों में गोपनीय तथा वर्गीकृत श्रेणी के हैं, अतः उन्हें जनसाधारण की जानकारी में नहीं लाया जा सकता ।
  4. अधिकारीवार विवरण नीचे दिया गया है –
    • अपर आयुक्त(प्रशासन) – प्रभारी प्रशासन तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी
    • अपर आयुक्त(शैक्षिक) - शैक्षिक मामले
    • संयुक्त आयुक्त(वित्त) – वित्तीय मामले
    • संयुक्त आयुक्त(प्रशासन) – स्था.-2, स्था.-3 तथा आरपीएस
    • संयुक्त आयुक्त(कार्मिक) - स्था.-1, प्रशा.-1, 2 तथा विधि एवं समन्वय
    • संयुक्त आयुक्त(प्रशि.) - शिक्षकों तथा कर्मचारियों का प्रशिक्षण
    • संयुक्त आयुक्त(शैक्षिक) - शैक्षिक मामले तथा प्रवेश
    • उपायुक्त (प्रशा. एवं वित्त)- प्रशासन व वित्तीय मामले
    • उपायुक्त (शैक्षिक) - शैक्षिक मामले